डियर मंदिर
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हा, यही तरीका है तुम्हारे पास आने का. हर बार बस इसी तरह से आते है तुम्हारे पास, मांगने. हम तो मिलने ही आते है पर हर बार कोई न कोई मुसीबत अान पड़ती है, तो ये मुलाकात का मुद्दा और नज़रिया ही बदल जाता है.
मंदिर (मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च) बहुत ही पवित्र जगह मानी जाती है और है भी. और क्यों न हो, तुम्हारे इस स्थान पर ही तो ऊपर वाले से मिन्नत करने का अवसर मिलता है.
दुख हो कष्ट हो, कोई पीड़ा हो तुम्हारे नज़दीक आते ही एहसास होता है कि सब कुछ अच्छा हो जाएगा. शांत वातावरण और आंखे बंद करके खड़े हुए चेहरे देखकर दिल को सुकून मिलता है.
तुम्हारे साथ रहने वाली चीज़े भी अलग आदर भाव से देखी जाती है जैसे की प्रसाद, शंख, दीपक जो तुम्हारे अभिन्न अंग है. सच कहूं तो तुमसे मिलकर शरीर में शक्ति का संचार होता है.
तुम्हारे लिए हर कोई अपनी योग्यता और हैसियत के हिसाब से कुछ न कुछ लाता है, इस सोच से की वो उस भगवान तक पहुंच जाएगा.
इस आधुनिक जीवन शैली में तुम्हारे अंदर भी कुछ सुविधाएँ दुविधाएं आई है, तुमसे मिलने के लिए अब ऑनलाइन अपॉइंटमेंट की जा सकती है, जानकर आश्चर्य हुआ.
सबसे ज्यादा तो पुजारी जी तुम्हारे नज़दीक है. (शायद भगवान से भी)। तुम्हारी देखभाल करना उन्हीं का काम है और वो अपनी ज़िम्मेदारी पूरी तरह से निभाते है.
किसी और काम के लिए जगह और पैसे हो ना हो तुम्हारे लिए तो सब कुछ मिल जाता है. तभी तो हम तुम्हारे पास आकर तुम्हारे अलावा जिन लोगो को दूसरी आवश्यक चीजे चाहिए वो मिले ऐसी भी प्रार्थना करते है, पता है थोड़ा पागलपन जैसा लगता है पर ठीक ही है ना पागलपन भी.
इस विषय पर ज्यादा कुछ नहीं कहूँगा, आजकल आप की ही बोलबाला है. चलिए अगली बार जब आऊंगा तो मिलने आऊंगा मांगने नहीं, कोशिश तो ज़रूर करुंगा :) .
जब तुम्हारे पास आता हूं
मैं महक जाता हूं
तुम्हारे आसपास के फूलों से नहीं
लेकिन मैं खुद फूल बन जाता हूं.
आपके अंदर बस रहे भगवान का सेवक
उत्तम दूधरेजिया
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Thank you for your visit and precious time.

Awesome 😍 nice thought dear😍
ReplyDeleteThank you 👍😊
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