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Tuesday, July 6, 2021

डियर बॉलीवुड

डियर बॉलीवुड

  तुम्हारा ज़िक्र होते ही सबसे पहला नाम दिमाग में पृथ्वीराज कपूर जी का आता है। “अनारकली” से लेकर “How's the Josh” तक का ये सफर कितना रोमांचक था और रहेगा।

Photo credit- cinestaan (Bollywood)


    स्टार, सुपरस्टार, हिट, फ्लॉप ये सारे शब्द यहां से जाने है हमने। हिंदुस्तान का नाम देश और दुनिया में आगे लाने में तुम्हारा योगदान बहुत बड़ा हैं। अगर किसी से पूछा जाए की हिंदुस्तान के बारे में आप क्या जानते है तो उनके पास सबसे पहला जवाब यही होगा कि “ बॉलीवुड”।


      लेकिन भारतीय सिनेमा सिर्फ बॉलीवुड से नहीं बनता, यहां पर उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम तक हर एक कोने में अलग अलग प्रादेशिक सिनेमा देखने को मिलेंगे। ये सभी मिलकर तुम्हें बनाते है। अलग पहचान है तुम्हारी,अपने अलग दृष्टांत है, दृष्टिकोण हैं।


     तुम्हारे अंदर जो बदलाव आया है, अब तो लोगो के जीवन के आधारित, मजबूत किरदार के ऊपर और देश में चल रही समस्या को लेकर काफी फिल्म बन रही है। ये सारी देश को प्रगति की ओर ले जा रही।


   
    पेडमेन, टॉयलेट एक प्रेम कथा से लेकर धोनी, मेरी कोम, संजू और उरी जैसी फिल्मों की वजह से तुम्हारे तरफ का झुकाव ज्यादा बढ़ गया है। कोई लव स्टोरी और ऐक्शन फिल्म के बदले अब तुम सबको आईना दिखाने का काम भी कर रहे हो।


    ये तो थी बाहरी दुनिया लेकिन इनके पीछे जो लोग लगातार काम करते है वो तो शायद ही कोई जानता हो। बहुत से लोगो के लिए उनकी रोजी रोटी कमाने का ज़रिया बस तुम ही हो। जब उम्र छोटी थी तो अक्सर ये सोचते थे कि ये जो इतने सारे नाम लिखते आते है ये बे वजह है, इन्हे दिखाने ही नहीं चाहिए। लेकिन अब ये समझ सकते है कि उन्हीं लोगों की वजह से तुम पूर्ण होते हों।

 Credit-Tripsavvy (Pinterest)


    पर्दे पर दिखने वाले हीरो, हीरोइन, विलेन के पीछे हज़ारों लोग काम करते है। यहां पर साल में तीन या चार फिल्में बनती है तो पांच साल में दो फिल्में बनाने वाले भी है।


    “विविधता में एकता” ये तुम्हारी वजह से सब जुड़े हुए हैं। वीर जारा से लेकर उरी तक पड़ोसी से प्यार से लेकर तकरार तक सब तुमने लोगो के सामने रखा हैं। हमेशा की तरह ये बाते करना चलता ही जा रहा, लेकिन अब सिर्फ चार लाइन।


कभी ज़मीन से कभी आसमान से,
कभी बर्फीले पहाड़ तो कभी रेत से,
सबको आयना दिखाने का काम किया है,
तुमने सिर्फ अपने वजूद से।



                                 तुमसे जल्दी जल्दी मिलने वाला
                                         उत्तम दुधरेजिया
   

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डियर स्कूल (Conversation)


डियर स्कूल

        टन………….टन………… अरे!!! भाग कहा रहे हो? ये कोई स्कूल नहीं जो बेल सुना और दौड़ ने लगे, ठहरिए  रुकिए तो सही कहानी अभी शुरू हुई है।



        हर किसी के लिए तुम्हारे साथ बिताए पल सबसे बेहतरीन होते है और वो इतनी सारी यादों के साथ होते है जो और कहीं नहीं मिल सकती। वो पल जिसमें हम अपने मूल को जानते है जहां से हमारे भविष्य की नीव रखते है, वो पल जो बेशकीमती है।


       लगता है थोड़े आगे चले आए, कोई नहीं फिर से देखते है शुरुआत से।

 
     तुम्हारे पास आकर पता नहीं क्यों इतना सुकून मिलता था कि यही समय था जब हम स्कूल टाइम से पहले निकल जाते थे और छुट्टी के बहुत समय बाद घर पहुंचते थे। घरवालों को अक्सर शिकायत रहती थी कि ऐसा क्यों? लेकिन हमारे पास भी जवाब रहता था कि स्कूल के मंत्री है हम तो सब चीज़े और प्रार्थना का सारा कार्यक्रम तय करना होता हैं।



      सारे दोस्त राह देखते है अगर कुछ भी करना हो, किसी को कोई भी प्रकार का स्वार्थ नहीं, कोई निजी दुश्मनी नहीं, कोई भी टीम के खिलाफ नहीं, क्या एकता होती थी सब में।


   हर किसी की अपनी खुबिया‌ॅ थी, जैसे की कोई दौड़ ने का काम है तो कोई एक करेगा, या किसी से बातचीत करनी है तो कोई एक करेगा, छोटी सी मैनेजमेंट कमेटी हुआ करती थी जो सारे कार्यक्रम अपने तरीके से करती थी।


    हर किसी का एक अलग ही नाम हुआ करता था। लड़ना झगड़ना सामान्य था लेकिन वो गुस्सा सिर्फ एक दिन के लिए रहता था। आए दिन किसी न किसी को चोट लगती थी जिसमे ज्यादातर घरवालों को पता नहीं चलता था।



    वो कहानियां और टॉफियां जिनसे हम आसानी से खरीदे जा सकते थे। साइकिल चलाना भी स्कूल  रास्ते ही आता है, गिरते संभलते कुछ न कुछ खूबियां खुद में जोड़ते रहते। शिक्षक दिवस पर अपनी अलग ही अदाकारी दिखती थी।


     इन सब के साथ साथ कभी कभी तुम्हारे पास नहीं आने के भी सबके अलग ही बहाने होते थे। जो तुम्हारे पास रोते हुए आता था वो तुमसे दूर जाने में भी दुखी था, और यही तो था तुम्हारा प्यार, यादें जिसे गुड बाय कहना कितना मुश्किल था। हर कोई अपने स्कूल के दिन वापस जीना चाहता हैं क्योंकि यही वो पल है जहा हर कोई एक समान है, जहा हर कोई अपनी मनमानी के सकता है, जहा हर कोई कल की फ़िक्र किए बिना जीता है।

  
    हर किसी के पास अपनी कहानी है, ये तो मेरी थी आप भी अपनी यादें ताज़ा कर लीजिए। दो लाइन कहना चाहूँगा।


यादों की दीवारों में बंद अच्छे थे
खुली वादियों में कोई अपना नहीं है।
     

                                                  उत्तम दुधरेजीया

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Sunday, February 17, 2019

डियर मंदिर

डियर मंदिर


       🙏
    हा, यही तरीका है तुम्हारे पास आने का. हर बार बस इसी तरह से आते है तुम्हारे पास, मांगने. हम तो मिलने ही आते है पर हर बार कोई न कोई मुसीबत अान पड़ती है, तो ये मुलाकात का मुद्दा और नज़रिया ही बदल जाता है.


    मंदिर (मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च) बहुत ही पवित्र जगह मानी जाती है और है भी. और क्यों न हो, तुम्हारे इस स्थान पर ही तो ऊपर वाले से मिन्नत करने का अवसर मिलता है.

   दुख हो कष्ट हो, कोई पीड़ा हो तुम्हारे नज़दीक आते ही एहसास होता है कि सब कुछ अच्छा हो जाएगा. शांत वातावरण और आंखे बंद करके खड़े हुए चेहरे देखकर दिल को सुकून मिलता है.

    तुम्हारे साथ रहने वाली चीज़े भी अलग आदर भाव से देखी जाती है जैसे की प्रसाद, शंख, दीपक जो तुम्हारे अभिन्न अंग है. सच कहूं तो तुमसे मिलकर शरीर में शक्ति का संचार होता है.

    तुम्हारे लिए हर कोई अपनी योग्यता और हैसियत के हिसाब से  कुछ न कुछ लाता है, इस सोच से की वो उस भगवान तक पहुंच जाएगा.

     इस आधुनिक जीवन शैली में तुम्हारे अंदर भी कुछ सुविधाएँ  दुविधाएं आई है, तुमसे मिलने के लिए अब ऑनलाइन अपॉइंटमेंट की जा सकती है, जानकर आश्चर्य हुआ.

     सबसे ज्यादा तो पुजारी जी तुम्हारे नज़दीक है. (शायद भगवान से भी)।  तुम्हारी देखभाल करना उन्हीं का काम है और वो अपनी ज़िम्मेदारी पूरी तरह से निभाते है.

     किसी और काम के लिए जगह और पैसे हो ना हो तुम्हारे लिए तो सब कुछ मिल जाता है. तभी तो हम तुम्हारे पास आकर तुम्हारे अलावा जिन लोगो को दूसरी आवश्यक चीजे चाहिए वो मिले ऐसी भी प्रार्थना करते है, पता है थोड़ा पागलपन जैसा लगता है पर ठीक ही है ना पागलपन भी.

      इस विषय पर ज्यादा कुछ नहीं कहूँगा, आजकल आप की ही बोलबाला है.  चलिए अगली बार जब आऊंगा तो मिलने आऊंगा मांगने नहीं, कोशिश तो ज़रूर करुंगा :) .
   

जब तुम्हारे पास आता हूं
मैं महक जाता हूं
तुम्हारे आसपास के फूलों से नहीं
लेकिन मैं खुद फूल बन जाता हूं.
    
                              आपके अंदर बस रहे भगवान का सेवक
                                            उत्तम दूधरेजिया

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Friday, February 1, 2019

Budget india




       It is budget day for India and every indian should watch it to observe how work is done by any government.


       For the future plans and the benefits that are given to the common people of india.


      There are some good techniques which can lead medium people to easiness of work process of different buy, sell and income related issues.


      As an indian everyone should be aware of what's going on in the country by the politicians they are choosing to develop the country.


#budget
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#flowerpot7


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Friday, November 23, 2018

Diwali

कल तक जलते थे दीए
आज फिर वही अंधेरी शाम है,
कल तक खुशियों में थे डूबे
आज फिर कही गुमनाम है,
कल तक जिन शायरियों से हमने,
जीते थे लाखो दिल
आज लफ्ज़ सारे हम पे,
कर रहे इल्ज़ाम है.

    This beautiful thing came in mind on the night of diwali when everyone is busy with lights, The next day everything will be forgotten as usual.





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www.flowerpot7.tk/diwali2018

डियर नौकरी

  डियर नौकरी        बचपन से लेकर आज तक सिर्फ एक ही ख्वाहिश थी, "एक अच्छी नौकरी". तुम्हारे लिए ही सारी ज़िन्दगी मेहनत करते है ऐ...

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